डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 10

काया जब वापस लौटी, तो उसके कदम पहले की तरह डरे-सहमे नहीं थे। अपनी माँ को खोने का दुख तो था, लेकिन साथ ही गाँव में अपनी पुश्तैनी ज़मीन और लोगों के बीच रहकर उसे अपनी जड़ों की ताकत का अहसास हो गया था। सबसे बड़ा आत्मविश्वास उसे भूपेंद्र साहब के उस एक मैसेज ने दिया था— "तुम्हारी बहुत कमी महसूस हो रही है।" इन शब्दों ने काया को यह यकीन दिला दिया था कि वह इस घर की ज़रूरत नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुकी है।जैसे ही उसने घर की घंटी बजाई, भूपेंद्र साहब ने खुद दौड़कर दरवाजा खोला। काया