उजाले की ओर –संस्मरण

स्नेहिल नमस्कार मित्रो      कभी कभी हम अपने आपसे डरकर जीते हैं। कोई भी अप्रत्याशित घटना जीवन में हुई नहीं कि हम घबरा जाते हैं। भूल जाते हैं कि यदि हम कुछ भी करना चाहें तो कर सकते हैँ। जरूरत है अपनी इच्छाइयों को देखने की. उन्हें पहचानकर पूरे विश्वास से आगे बढने की! रामायण में कहीं एक प्रसंग आता है,जो कुछ समझने के लिए बाध्य करता है। जब सीता जी का हरण हुआ, उनका पता लगाने के लिए समुद्र को फांद कर लंका जाना था। तब वहाँ सभी उपस्थित लोग अपनी अपनी शक्तियों का बखान कर रहे थे।कोई