अन्तर्निहित - 34

[34]शैल ने सारा के साथ आश्रम में प्रवेश किया। संध्या हो चुकी थी। आश्रम में विशेष गतिविधियां नहीं दिख रही थी। दो चार शिष्य अपने अपने कार्य में व्यस्त थे। एक कोने से धूँआ आ रहा था। “देखो, वहाँ भोजन पक रहा है।” सारा ने वहाँ देखा। दोनों ने उस दिशा में चरण बढ़ाए ही थे कि पीछे से किसी ने कहा, “आप दोनों को गुरुजी ने बुलाया है। आईये मेरे साथ।”दोनों ने मौन अनुसरण किया। एक कुटीर के सम्मुख वह रुका, “भीतर गुरुजी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।” वह चला गया। शैल भीतर प्रवेश करने आगे बढ़ा। सारा वहीं रुक