---कल और आज लेखक: विजय शर्मा एरी प्रस्तावनायादें कभी पुरानी नहीं होतीं। वे हमारे भीतर ऐसे जीवित रहती हैं जैसे किसी पुराने घर की दीवारों पर टंगी तस्वीरें—धूल से ढकी हुईं, पर हर बार साफ करने पर चमक उठती हैं। यह कहानी भी ऐसी ही यादों की है, जो एक साधारण इंसान के जीवन को असाधारण बना देती हैं। ---पहला अध्याय: गाँव का आँगनरामेश्वर सिंह अब सत्तर वर्ष के हो चुके थे। शहर की भागदौड़ से थककर वे अपने पैतृक गाँव लौट आए थे। गाँव का वही पुराना घर, मिट्टी की दीवारें, नीम का पेड़ और आँगन में बिछी खटिया—सब कुछ उन्हें बचपन