बिश्नोई जीवन का एक अनमोल रत्न है, जहाँ हर साँस प्रकृति के साथ ताल मिलाती है। यह कहानी राजस्थान के थार मरुस्थल की रेत में बसी एक छोटी-सी बस्ती से शुरू होती है, जहाँ बिश्नोई धर्म के सिद्धांत आज भी जीवंत हैं।कालू की कहानीकालू राम नाम का एक युवा बिश्नोई था, जो नागौर जिले के एक छोटे से गाँव पीपासर के पास बसे मुकाम में रहता था। उसका जन्म ऐसे समय हुआ जब गाँव में सूखा पड़ चुका था। खेत सूखे, चारे की कमी से पशु मर रहे थे, लेकिन बिश्नोई परिवार ने कभी शिकार नहीं किया, न ही हरे