और तीन दिन मैं रिटायरिंग रुम में रुका।फिर मैंने चौबेजी से कहा,"किराए पर कमरा दिला दोऔर फिर उन्होंने राम करण से कहा। उसने मेरे लिए रावली में कमरा देखा। उस समय उसका किराया पच्चीस रुपए महीना था। और यह कमरा रावली में था। यहां से आगरा फोर्ट मैं ड्यूटी परपैदल आ जा सकता था।उस मकान में वैसे तो कई किरायेदार थे।लेकिन मेरे वाले पोर्शन में एक कमरे में एक बंगाली परिवार, एक में दलवीर सिंह रहते थे जो यू पी पुलिस में इंटेलिजेंस में सब इंस्पेक्टर थे और सामने रमेश जो पुलिस में सिपाही था। हम सब अकेले ही रहते थे।