इस घर में प्यार मना है - 11

रात…एक बार फिर पूरी हवेली नींद में डूबी हुई थी। पर इस बार कार्तिक नहीं सोया था। उसकी आँखों में नींद नहीं फ़ैसला था।जैसे ही सबके कमरों की लाइटें बुझीं—कार्तिक सीधे उस काली कोठरी की ओर गया। उसके हाथ काँप नहीं रहे थे।धड़ाम!एक ही वार में ताला टूट गया।कार्तिक जैसे ही अंदर घुसा—उसका दिल फट पड़ा। संस्कृति ज़मीन से टेक लगाए बैठी थी।मुँह पर टेप चिपका हुआ। आँखें डर से फटी हुई। शरीर थरथरा रहा था।कार्तिक (टूटती आवाज़ में) बोला - संस्कृति…वो भागकर उसके पास पहुँचा। काँपते हाथों से तुरंत उसके मुँह से टेप हटाया। टेप हटते ही संस्कृति एक पल