बारात का आगमन ज़ोर-शोर से हुआ। घोड़ों की टापें, आतिशबाज़ी, और नाचते हुए लोग। करण घोड़ी पर आया—सिर पर सेहरा, चेहरे पर वही आत्मविश्वास भरी मुस्कान। फिर घोड़ी से उतरकर सीधे अपनी महँगी लाल लैंबॉर्गिनी में बैठा। इंजन की दहाड़ पर भीड़ ने तालियाँ बजाईं। कुछ देर बाद दुल्हन की एंट्री हुई। फूलों से सजा रथ, ऊपर से गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश। सौम्या लाल जोड़े में थी। चेहरा शांत, मुस्कान सधी हुई—पर आँखें बार-बार भीड़ में कुछ ढूँढ रही थीं। मंडप में दोनों को बैठाया गया। पंडित मंत्र पढ़ने लगे। करण झुककर कुछ कहता, उँगलियों से हल्की-सी छेड़ करता।