मेरे दूल्हे को मरना होगा - अध्याय 5: बदले की हवा

रात का जंगल कीड़ों की किटकिट और सियारों की हुंकारों से भरा था। पुराने पत्थर की खदान के पास खुला मैदान था। चारों तरफ़ ऊँची घास, बीच में टीन की छत वाला एक ढाँचा। दो बल्ब लटक रहे थे, जिनकी रोशनी में कीड़े मरते जा रहे थे। ठाकुर धुरंधर सिंह की गाड़ी रुकी। उसके पीछे एक और जीप। हीरा आगे उतरा। उसके पीछे चार आदमी—साधारण कपड़ों में, पर चाल से साफ़ कि हथियार पास हैं। ठाकुर धुरंधर सिंह भी उतरे। पीछे वाली जीप से छह और हथियारबंद गुंडे निकले। जख्खड़ पहले से मौजूद था। नक़ाब नहीं था। दाढ़ी खुली थी।