मटन बिरयानी की खुशबू अब भी हवा में तैर रही थी। मंत्री जगनमोहन दयाल ने उँगलियाँ धोते हुए तसल्ली से कहा, “जानकी भाभी—आपके घर जैसी बिरयानी पूरे प्रदेश में कहीं नहीं मिलेगी।” जानकी देवी पल्लू सही करती हुई बोलीं, “निर्मला दीदी और बच्चों के लिए एक डब्बा पैक करवा रही हूँ।” मंत्री दयाल हँसे। “नहीं भाभी, जो बात ताज़ा खाने में है वो अलग ही होती है। उन्हें लेकर ही आऊँगा, यहीं खिलाने।” “जी, बिल्कुल,” जानकी देवी ने कहा। “आपका ही घर है।” ठाकुर धुरंधर सिंह मुस्कराए। “आइए, गोष्ठी में चलते हैं।” दोनों के बीच वही पुरानी अपनायत थी—सत्ता की,