बाथरूम वाली घटना की उसी शाम, बड़ी हवेली होने वाली शादी की सजावट से जगमगा रही थी। यही हवेली सौम्या के बचपन का घर था। सौम्या के पिता, ठाकुर धुरंधर सिंह, पुराने समय के राजवाड़ी ज़मींदार थे। मौजूदा पहचान भले ही एक सांसद की थी, लेकिन पैसा, रौब और शक्ति अब भी राजवाड़ों जैसी ही थी। हवेली के चारों ओर फैला बाग़ तरतीब से कटा हुआ था, लेकिन हर पगडंडी पर निगाहें तैनात थीं। चप्पे-चप्पे पर हथियारबंद गुंडों का पहरा था। कुछ सजे-धजे कमांडो—बूट चमकाते, कंधों पर राइफलें। कुछ उन्हीं में घुले-मिले सादे कपड़ों में—कहीं बनियान पहने, कहीं जैकेट डाले,