अध्याय 3 : ज़िंदा तस्वीर का सचकमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी ही धड़कनों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी। वह दरवाज़े को पीट रही थी, लेकिन बाहर से कोई जवाब नहीं आ रहा था। हार मानकर वह पलटी और उसकी नज़र फिर उस व्हीलचेयर पर बैठी लड़की पर पड़ी।"सुनिए... आप कौन हैं? क्या आप ठीक हैं?" अंजलि ने कांपते हुए हाथ उस लड़की के कंधे पर रखा।जैसे ही उसने छुआ, अंजलि के रोंगटे खड़े हो गए। उस लड़की का शरीर बर्फ़ जैसा ठंडा था। जैसे ही अंजलि ने उसे थोड़ा घुमाया, उसे एहसास हुआ