मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 2

अध्याय 2: आधी रात का राज़​स्टोर रूम की खिड़की से आती ठंडी हवा अंजलि के बदन में सिहरन पैदा कर रही थी। बाहर बारिश तेज़ हो चुकी थी, लेकिन बंगले के अंदर से आती उन चीखों ने अंजलि का खून सुखा दिया था।​"नहीं! मुझे छोड़ दो! रुद्र... तुम ऐसा नहीं कर सकते!"— किसी औरत की दबी हुई आवाज़ आई और फिर एक जोरदार धमाका हुआ, जैसे कोई कीमती गुलदस्ता दीवार पर दे मारा गया हो।​अंजलि से अब और इंतज़ार नहीं हुआ। रुद्र ने उसे अंदर आने से मना किया था, लेकिन किसी की जान खतरे में हो तो वह चुप