घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई। अलमारी से सलवार-कमीज़ निकाली और बेड पर रख दी। फिर बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और नल खोल दिया। एक-एक कर उसने कपड़े उतारकर गंदे कपड़ों के बैग में रख दिए। पानी गिरता रहा। गरम भाप उठती रही। एक हफ्ते में शादी थी। उसकी आँखों के सामने करण का चेहरा तैर गया— करण, उसका मंगेतर, होने वाला पति। अमेरिका रिटर्न। स्मार्ट और शार्प। स्विट्ज़रलैंड के हनीमून