बिल्ली जो इंसान बनती थी - 2

कमरे में अंधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। शानवी खाना बनाकर टीवी के सामने बैठ गई। उसका बिल्ला… यानी कार्तिकेय…चुपचाप एक कोने में बैठा उसे देख रहा था। वो घड़ी की तरफ देखता।बार-बार।⏰ 10:30… 11:15… 11:50…उसके दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी।कार्तिकेय बोला - बस थोड़ा सा और…फिर मैं खुद नहीं रहूँगा…फिर मैं वो बन जाऊँगा… जो मैं असल में हूँ…।वो मन ही मन सोच रहा था —कितना अजीब है…दिन में मैं उसके पैरों के पास घूमता हूँ,और रात में… उसी के पास बैठकर उसे देख भी नहीं सकता…।शानवी सोने की तैयारी करने लगी। उसने लाइट बंद की और बिस्तर