किसी को नहीं पता था—कि संस्कृति सिर्फ इस घर से नहीं, अपनी ही बीमारी से भी लड़ रही थी।संस्कृति को हेलुसिनेशन होते थे। और उसके साथ-साथ स्लीप पैरालिसिस।ऐसी बीमारी जिसमें आँखें खुली रहती हैं,दिमाग जागता रहता है—पर शरीर मर चुका-सा हो जाता है।शादी के बाद जब से कार्तिक हर रात उसके पास सोता था तब वो सुरक्षित थी।क्योंकि उसे पता था अगर डर आएगा तो कोई उसे हिला देगा।कोई कहेगा—मैं यहीं हूँ।काली कोठरी में अंधेरा और गहरा हो गया। सीलन की बदबू।दीवारों से टपकती नमी।संस्कृति घुटनों में सिर छुपाकर रोती रही।संस्कृति (सिसकते हुए) बोली - कार्तिक जी…मुझे डर लग रहा है…।लेकिन