एकांश वर्शाली का हाथ पकड़ कर कहता है। एकांश :- वर्शाली उस रात मैने जो किया वो मेरा कर्तव्य था। पर वर्शाली तुम जो मेरे लिए कर रही हो वो पागलपन है। इसिलिए तुम अपने लोक लौट जाओ। मैरे वजह से तुम अपने आपको खतरे मे मत डालो और यहां से अपने लोक चले जाओ। एकांश की बात सुनकर वर्शाली कहती है--.वर्शाली: - ये आप कैसी बात कर रहे हैं एकांश जी। मै आपको छोड़कर तब तक नही जा सकती एकांश जी। जब तक के ये आने वाला पूर्णिमा पार नहीं हो जाता उस समय तक मैं आपको छोड़कर नही जाउगीं। उधर भानपुर