कमरा नंबर 302

रात के ठीक 2:17 बजे अद्भुत की नींद अचानक टूट गई। पंखा चल रहा था, लेकिन कमरे में हवा नहीं थी, सिर्फ़ एक अजीब-सी घुटन थी, जैसे दीवारें धीरे-धीरे पास आ रही हों। उसका गला सूखा हुआ था और दिल बिना वजह तेज़ धड़क रहा था। उसने करवट बदली ही थी कि मोबाइल स्क्रीन अपने आप जल उठी। स्क्रीन पर लिखा था— “आज फिर वही सपना आएगा।” अद्भुत सिहर गया, क्योंकि यह मैसेज उसने खुद को नहीं भेजा था। पिछले सात दिनों से हर रात यही हो रहा था—एक चेतावनी, और फिर वही डरावना सपना।सपने में वह हमेशा एक बंद