नीलम : एक नाम, कई फैसले

गांव में सुबहें अक्सर शोर से नहीं, खबरों से शुरू होती हैं।उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ।माँ की आवाज़ में एक अजीब-सा ठहराव था जब उन्होंने कहा—“सुना है, मोहल्ले की लड़की… भाग गई है।”गांव में भाग जाना कोई क्रिया नहीं, एक तमगा होता है।और इस तमगे को फैलाने का काम बहुत तेज़ी से होता है—हवा से भी तेज़।कौन कह रहा है, क्यों कह रहा है—इन सवालों की ज़रूरत नहीं होती।बस इतना काफी होता है कि कोई लड़की है, और उसने तय सीमा लांघ ली है।मैंने उम्र सुनी—सत्रह, अठारह।इतनी कम उम्र में इतना बड़ा फैसला?मन ने सवाल उठाया, लेकिन जवाब