नम आँखे - 3

एक तरफ माँ का दुनिया से अन्तिम विदाई । दूसरी तरफ दो मासूम बच्चो की दुनिया मे शुरुआत अभिनव का मन खुशी जाहिर नही कर सकता था ' और गम व्याह कर पा रहा था। उस का संयम तो माँ थी। कैसे उन के बिना रहेगा। सपने में भी नही सोचा था। कि ऐसा समय भी आयेगा । धीरे -धीरे समय अपनी रफ्तार पकड़ रहा था। अभिनव का मन हर पल माँ को "याद करता ।और कानो मे सुनाई देता बेटा -बेटा कह कर कही से माँ अवाज लगा रही है।नैन्सी - अभिनव जी आखिर कब तक ऐसा चलेगा।अपने परिवार