(सुबह की हल्की रोशनी कमरे में फैल रही है।)(सुनीति की आँख खुलती है।)(वो हाथ बढ़ाकर बिस्तर के दूसरे हिस्से को टटोलती है…खाली।)सुनीति (घबराकर) बोली - “कौशिक जी…?”(वो उठकर चारों तरफ़ देखती है।)कमरा वैसा ही सजा हुआ…पर पति ग़ायब।(सुनीति की साँसें तेज़ हो जाती हैं।)सुनीति (टूटती आवाज़ में) बोली - “नहीं… फिर से नहीं…।”(उसकी नज़र टेबल पर रखे चश्मे पर पड़ती है।)(हाथ काँपते हैं।)(सुनीति जल्दी से चश्मा पहन लेती है।)(एक पल सन्नाटा…)(फिर…)(बिस्तर पर कौशिक दिखाई देता है — चैन से सोता हुआ।)सुनीति (आँखों में आँसू लेते हुए) बोली - “यहीं हो आप…”(वो गहरी साँस लेती है।)(सुनीति धीरे-धीरे बिस्तर पर बैठती है।)(वो कौशिक के पास