सौदे का सिन्दूर - भाग 4

शक्कर और आंसूराठौर मेंशन का किचन (रसोई) सान्वी के माता-पिता के घर से भी बड़ा था। रसोई के चारों तरफ चमकती हुई स्टील की मशीनें, बड़े-बड़े ओवन और एक ऐसा फ्रिज जिसमें शायद एक महीने का राशन आ सकता था। सान्वी चौखट पर खड़ी थी, और उसे अंदर पैर रखने में भी झिझक हो रही थी। यह घर की रसोई कम और किसी फाइव स्टार होटल ज्यादा लग रहा था।किचन के हेड कुक, जिन्हें सब 'महाराज जी' कहते थे, ने सान्वी को देखकर सम्मान से सिर झुकाया।"नमस्ते बहू रानी। दादी माँ ने बताया कि आज आपकी  रसोई की रस्म है।