शहर की सुबह अब अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी से शुरू होती थी। निखिल अपनी बालकनी में खड़ा नीचे की सड़क को देख रहा था। सड़क बिल्कुल साफ थी, न कहीं कचरा, न कहीं ट्रैफिक का शोर। एक छोटी सी सफेद रंग की मशीन, जो दिखने में किसी बड़े कछुए जैसी थी, फुटपाथ के किनारे जमी धूल को बड़ी बारीकी से सोख रही थी।"चाय तैयार है, निखिल।"पीछे से एक मधुर आवाज़ आई। यह ज़ारा थी। घर की होम-मैनेजर। ज़ारा कोई इंसान नहीं थी, बल्कि घर की दीवारों और उपकरणों में समाया हुआ एक एआई सिस्टम