महाभारत का प्रसिद्ध पासा क्रीड़ा प्रसंग: दुर्योधन और युधिष्ठिरमहाभारत: जब धर्म पासों की चाल में उलझ गयाहस्तिनापुर का राजमहल उस दिन असामान्य रूप से शांत था। आकाश में बादल घिरे थे, मानो प्रकृति भी आने वाले अनर्थ की आहट सुन रही हो। राजसभा को विशेष रूप से सजाया गया था। स्वर्ण जटित स्तंभ, रेशमी परदे और दीपकों की मद्धिम रोशनी—सब कुछ वैभवपूर्ण था, पर उस वैभव के पीछे एक गहरी साजिश छिपी हुई थी।दुर्योधन अपने कक्ष में अधीरता से टहल रहा था। उसके मन में वर्षों से पांडवों के प्रति ईर्ष्या की ज्वाला धधक रही थी। इंद्रप्रस्थ की समृद्धि, युधिष्ठिर