वेदान्त 2.0 — ज्ञान नहीं, जीवन का बोध 1. आज का “ज्ञान” जीवन को सूखा बना रहा है आधुनिक धर्मगुरु, मोटिवेशन स्पीकर, लाइफ़-कोच —सब एक ही काम कर रहे हैं:जीवन को मैनेज करना सिखा रहे हैं, जीना नहीं।“ऐसा करो, वैसा मत करो”“ये पाप है, ये पुण्य है”“ये सफल जीवन है, यही विकास है”यह सब लाइफ़-मैनेजमेंट है —अस्तित्व-बोध नहीं।असल प्रश्न —मैं कौन हूँ?दूसरा कौन है?अस्तित्व क्या है और उसके नियम क्या हैं?इन प्रश्नों पर कोई नहीं ठहरता,क्योंकि यहाँ नुस्खे काम नहीं आते —यहाँ स्वयं गिरना पड़ता है। 2. पाप–पुण्य, अच्छा–बुरा — सब सापेक्ष हैं वेदान्त 2.0 की दृष्टि में“यह पाप है,