0 से मानव तक — और मानव से 0 तक ░A░ ░P░h░i░l░o░s░o░p░h░y░ ░t░h░a░t░ ░T░r░a░n░s░f░o░r░m░s░ ░S░p░i░r░i░t░u░a░l░i░t░y░ ░i░n░t░o░ ░a░ ░S░i░m░p░l░e░ ░S░c░i░e░n░c░e░० से मानव तक आने की यात्रा में और मानव से फिर ० की ओर लौटने की प्रक्रिया मेंएक अनुभव करोड़ों बार घटित होता है —जिसे संसार दुःख कहता है।पर यह दुःख कोई त्रुटि नहीं है।यह कोई दंड या अभिशाप नहीं है।यह स्वाभाविक प्रक्रिया है।इससे कोई नहीं बच सकता —यदि कहा जाए कि भगवान भी नहीं बच सकता,तो भी सत्य अधूरा नहीं होता।क्योंकि वास्तविकता यह है किकोई अलग से भगवान नहीं है।हर जीव स्वयं भगवान है।कोई विशेष सत्ता बनकर पैदा नहीं हुआ