वेदान्त 2.0 - भाग 30

स्त्री–पुरुष, संघर्ष–समर्पण : एक विज्ञान 1️⃣ स्त्री के लिए फल नहीं—कृत्य ही आनंद हैस्त्री का धर्म प्राप्ति नहीं, स्थिति है।जो वह करती है—उसी क्षण में पूर्ण होती है।उसका आनंद भविष्य में नहीं, वर्तमान में है।फल की प्रतीक्षा नहीं—इसलिए अहंकार भी नहीं। 2️⃣ पुरुष का जन्म संघर्ष से होता है पुरुष का पथ—चढ़ाई है, आक्रमण है, लक्ष्य है।संघर्ष से ऊर्जा पैदा होती है।लेकिनजब वह फल को सफलता समझ लेता है—वहीं अहंकार जन्म लेता है।और वही माया है। 3️⃣ संघर्ष → ऊर्जा → समर्पण = रूपांतरण संघर्ष बुरा नहीं है।संघर्ष ऊर्जा पैदा करता है।लेकिन ऊर्जा का अंतिम चरण समर्पण है।समर्पण में—ऊर्जा