वेदान्त 2.0 - भाग 29

धर्म नहीं — गुटों से मुक्त आत्मा की घोषणा तुम कहते हो — “हम सनातनी हैं”पर न वेद पढ़े,न उपनिषद को जिया,न गीता को समझा।जो तुम जी रहे हो —वह धर्म नहीं,वह गुट है।और गुट कभी धर्म नहीं होता —गुट राजनीति से पैदा होता है,डर से पलता है,और भीड़ से ताक़त लेता है।सनातन ने कभी कहा ही नहीं —“मेरे जैसे बनो”“मेरे खिलाफ़ हो तो दुश्मन हो”यह भाषा सनातन की नहीं,यह गुलामी की भाषा है —जो सत्ता से, डर से और इतिहास के घावों से आई है।जिस दिन तुमनेअपनी आत्मा का निर्णयकिसी गुरु, किसी झंडे, किसी संगठन के हाथ में