धर्म की दुकान जो कहते हैं—“हम ही सत्य हैं,गुरु ही ब्रह्मा-विष्णु-महेश हैं,गुरु ही शास्त्र हैं,”वहीं से दुकान खुल जाती है।वे कहते हैं—पुण्य की चाबी हमारे पास है,आशीर्वाद हमारे पास है,धन, साधन, प्रसिद्धि—सब हमारे आशीर्वाद से मिलता है।गरीब से कहते हैं—“हमारे आशीर्वाद से सफल हो जाओगे।”और जो सफल हो गया, उससे कहते हैं—“सब माया है, त्याग दो, सेवा में लगा दो।”सेवा का अर्थ बदल जाता है।तुम दान दो—वे तुम्हें धन्यवाद देंगे,और बदले में “पुण्य” का वादा।सेवा-चवन्नी की शेष डकार लेते है सेवा भी इक्कठा इकट्ठा करते है।फाइव-स्टार सुरक्षा उनकी,फाइव-स्टार सुविधा उनकी,और नाम “सेवा” का।धन इकट्ठा होता है पुण्य के