वेदान्त 2.0 - भाग 25

वेदान्त 2.0 मात्र एक दर्शन है — समझ।इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।यहधर्म नहीं है,संस्था नहीं है,गुरु–समुदाय नहीं है,भगवान, देश, जाति, पंथ नहीं है।यहकोई साधना–उपाय नहीं,कोई मार्ग नहीं,कोई फीस नहीं।यह केवल समझ है। समझ का नियम समझ मिलते हीकचरा गिराया नहीं जाता —अपने आप गिर जाता है।लेकिनयदि तुम्हें अपनी गंदगी पर ही विश्वास है,तो बात यहीं छोड़ दो।फिरअपनी गंदगी से जीतकर दिखाओ।क्योंकियदि समझ से हीयोग, ज्ञान, साधना, गुरु, धर्म, विकाससब मिल रहा है —तो फिरइतने उपाय क्यों?इतना नाटक क्यों? सबसे बड़ा अंधविश्वास यह कहना कि —“सब मेरे जैसे हैं, इसलिए मैं उन्हीं के साथ चलूँगा”सबसे बड़ा अंधविश्वास है।भीड़