कोख का संघर्ष

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भाग 1: विश्वास की दरारसुहानी खिड़की के पास खड़ी बाहर गिरती बारिश की बूंदों को देख रही थी, लेकिन उसका ध्यान बाहर के मौसम पर नहीं, बल्कि अपने हाथ में पकड़ी उस स्ट्रिप पर था जिस पर दो गुलाबी लाइनें साफ चमक रही थीं। उसके दिल की धड़कनें इतनी तेज थीं कि उसे खुद अपने कानों में सुनाई दे रही थीं। डर, खुशी और घबराहट का एक अजीब सा मिश्रण उसके भीतर उथल-पुथल मचा रहा था।तभी कमरे का दरवाजा खुला और मानव अंदर आया। वह हमेशा की तरह अपनी ऑफिस की थकान उतारने के लिए सोफे पर ढह गया।थक गया