आदरणीय संपादक महोदय, यह 'शापित प्रेम की छाया' का अगला भाग है। इसमें अध्याय 2 से लेकर 25 तक की पूरी कहानी है।"अध्याय 2: जादुई भूलभुलैया और परछाइयों का पहरा (भाग-1)महल के भीतर की हवा बाहर की बर्फीली आंधी से भी अधिक भारी और दमघोंटू थी। यहाँ की दीवारों पर लगी मशालों की रोशनी सामान्य पीली नहीं थी, बल्कि उनमें एक गहरा नीलापन था, जो इस बात का संकेत था कि महल की सुरक्षा में 'आत्मा-ऊर्जा' (Soul Energy) का इस्तेमाल किया गया है। इज़ोल्ड ने महसूस किया कि जैसे ही उसने महल की दहलीज लांघी, उसके शरीर की जादुई ऊर्जा