कहानीनए साल की शुरुआत 31 दिसंबर 2025 की रात थी। शहर की सड़कों पर रोशनी थी, लेकिन उन रोशनियों के बीच कहीं-न-कहीं अंधेरा भी था—दिलों का, उम्मीदों का, रिश्तों का। हर तरफ “हैप्पी न्यू ईयर” के पोस्टर, मोबाइल पर चमचमाते मैसेज, सोशल मीडिया पर मुस्कुराते चेहरे… पर इन सबके बीच कुछ चेहरे ऐसे भी थे, जो मुस्कुरा तो रहे थे, लेकिन अंदर से टूटे हुए थे।अनुज अपनी खिड़की के पास खड़ा था। सामने वाली इमारतों में पटाखों की रोशनी चमक रही थी। घड़ी की सुइयाँ बारह के करीब पहुँच रही थीं।उसके मन में एक अजीब-सी खालीपन थी।“एक और साल चला गया…”उसने