अब आगे।।।वहीं नियति उनकी बाते ध्यान से सुन रही थी,,उसने डॉ सुशीला से कहा,,आंटी मैं आपकी बाते समझ रही हूं,,पर में क्या करूं न चाहा कर के भी वो 10 साल पुरानी बाते ज़हन में आ जाती है,, ओर आप इसी वजह से मुझे शिमला से यहां पुणे ले आई थी,,ताकि में उस जगह से , अपने पास्ट से दूर रहूं।।।वहीं उसकी बात सुनकर डॉ सुशीला ने गहरी सांस लेते हुए कहा,, नियति, बेटा बीती बातोंको याद करके सिर्फ तकलीफ होती है,,ओर में नहीं चाहती कि तुम्हे कोई ओर तकलीफ हो,,फीकी हंसी हंसते हुए,,मेरी खुद की तो कोई संतान नहीं