यह महाभारत की कथाओं पर आधारित रचनात्मक संवाद है, जिसमें मूल भाव सुरक्षित रखे गए हैं।युद्ध से पहले श्रीकृष्ण, माता कुंती और कर्ण का संवादकुरुक्षेत्र के युद्ध की विभीषिका से ठीक पहले का समय था। आकाश में एक अजीब सा मौन छाया हुआ था, मानो प्रकृति भी आने वाले रक्तपात को भांप चुकी हो। उसी समय गंगा के तट पर एक गंभीर और हृदयविदारक संवाद होने वाला था, जो इतिहास के सबसे करुण प्रसंगों में गिना जाता है।सबसे पहले वहाँ श्रीकृष्ण पहुँचे। उनके मुख पर वही शांति थी, पर नेत्रों में गहरी करुणा। थोड़ी देर बाद कर्ण आए—तेजस्वी, दानवीर, पर