लेखिका: [खुशबू️......दुनिया की भीड़ में श्री खुद को हमेशा अकेला पाती थी। उसके विचार, उसकी पसंद और जीने का तरीका सबसे अलग था, शायद इसीलिए लोगों से उसकी पटरी कभी नहीं बैठी। रिश्तों के मामले में तो उसकी किस्मत और भी बेरहम निकली; उसने जिसे भी अपना समझा, वहां से उसे सिर्फ धोखा ही मिला। इन धोखों ने उसे और भी खामोश कर दिया था। अब उसकी दुनिया सिर्फ उसके रंगों, कूचियों और डिजाइनों तक सिमट कर रह गई थी।श्री को यह मालूम नहीं था कि उसकी उंगलियों में एक ऐसा जादू है जो निर्जीव चित्रों में जान फूंक सकता