वक्त की रेत,ढेर सारी मासूमियत

"वक्त रेत की तरह हाथों से फिसल जाता है, पर पीछे छोड़ जाता है कुछ सुनहरी यादें। यहाँ मैं साझा करूँगी अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के वो छोटे-छोटे और मासूम किस्से, जो कभी 'मक्खी जी' की दोस्ती में दिखते हैं, तो कभी खिड़की से आती गुनगुनी धूप में। यह मेरी डायरी का वो कोना है जहाँ बचपन की सादगी है, घर की प्यारी नोक-झोंक है और वो अनमोल पल हैं जिन्हें मैं वक्त की रफ़्तार से चुराकर सहेजना चाहती हूँ। आइए, मेरे साथ इस मीठे सफर का हिस्सा बनिए।"          ️ "वक्त की रेत,ढेर सारी मासूमियत"️आज सुबह