तेरी मेरी कहानी - दादी की जुबानी

तेरी मेरी कहानी दादी की जुबानीदादी दादी हाँ बच्चो आओं खेलो और मैंने तुम्हारे लिय आम मंगाएं है। लो खालो मेरे पास बैठकर आम का मौसम आ गया है। आज बच्चो को आम का स्वाद कराती हू । नहीं -नही दादी हमे आम नही चाहिय। क्यों? बच्चो आज हमे कुछ और चाहिय क्या? चाहिय । मुझ बुढिया के पास क्या रखा है। जो मैं दूं । बच्चे- दादी हमें आप का अनुभव (तर्जुवा) चाहिए।दादी तुम ठहरे इक्शवी सदी के बालक मेरी बातो मे तुम्हे क्या मिलेगा ।बच्चे जिद करते हैं। तभी ही हम आम खायेगे।दादी- अच्छा मेरी आँखो के तारे अपनी