जहां एक ओर त्रिशा तैयार होकर ब्यूटी पार्लर में बैठी थी वहीं यहां गेस्ट हाउस में राजन भी तैयार था और बारात के जाने का प्रोगाम शुरु हो चुका था। जैसे ही लड़के वालों ने अपना कार्यक्रम शुरु किया तभी कल्पेश ने मानस को भेज कर त्रिशा को भी वहां बुला लिया और बारात के वहां पहुंचने से पहले ही त्रिशा को ऊपर के कमरे में घर की महिलाओं के बीच छोड़ दिया गया। अपने मन में लाखों उम्मीद लिए और आंखों में हजारों सपने सजाए त्रिशा वहां कमरे में बैठी थी। उसके पेट में बार बार घबराहट और नर्वसनेस के कारण