यहाँ युद्ध के बाद भगवान श्रीराम और हनुमान जी के बीच संवाद प्रस्तुत है — भावपूर्ण, भक्तिरस से युक्त और लगभग लंका का युद्ध समाप्त हो चुका था।रावण का अंत हो गया था, अधर्म पर धर्म की विजय हो चुकी थी। लंका की भूमि शांत थी, पर उस शांति में भी युद्ध की स्मृतियाँ गूँज रही थीं। समुद्र से आती शीतल वायु जैसे थके हुए योद्धाओं को विश्राम का संदेश दे रही थी।भगवान श्रीराम एक शिला पर बैठे थे। उनके नेत्रों में करुणा थी, मुख पर शांति, किंतु हृदय में गहन विचार। तभी हनुमान जी हाथ जोड़कर उनके समीप आए।हनुमान जी:“प्रभु,