अध्याय 1 – शांत पानी, अशांत रहस्यहिंद महासागर उस दोपहर असामान्य रूप से शांत था।लहरें थीं, लेकिन उनमें चंचलता नहीं थी—जैसे समुद्र खुद किसी बात की प्रतीक्षा कर रहा हो।धूप ठीक सिर के ऊपर थी। घड़ी ने दोपहर के ठीक दो बजाए थे।यह इलाका आम समुद्री रास्तों से अलग था।अंडमान–निकोबार द्वीपसमूह से कुछ ही मील दूर, वह हिस्सा जहाँ पानी गहरा होता है… और सवाल भी।भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल का संयुक्त पेट्रोलिंग जहाज़ उसी रूट पर था।डेक पर खड़ा एक जवान दूरबीन आँखों से लगाए क्षितिज को स्कैन कर रहा था।नीला आसमान।नीला समंदर।हर दिशा में खालीपन।अचानक—“सर… वहाँ कुछ दिख