भाग-3 : दादी माँ का आशीर्वाद और झूठा दिखावासूरज की पहली किरणें पर्दों से होते हुए कमरे में दाखिल हुईं और सीधे सान्वी की आंखों पर पड़ीं। सान्वी जल्दी से उठ कर बैठ गई। कुछ समय के लिए उसे समझ ही नहीं आया कि वह कहाँ है। यह उसका छोटा सा, नमी वाला कमरा नहीं है, और न ही बाहर से दूध वाले की साइकिल की घंटी की आवाज़ नहीं आ रही थी। तभी उसकी नजर बिस्तर की दूसरी तरफ गई तभी वह अपने होश में आई और उसे कल रात की बातें याद आई की यह उसके सामने 'तकियों