शादी को कुछ ही दिन बीते थे।संस्कृति अब भी उस घर को समझने की कोशिश में थी—कि कब, कैसे सब ठीक होगा।लेकिन उस दिन उसके शरीर ने उसे धोखा नहीं दिया… समाज ने दिया।सुबह-सुबह संस्कृति को दर्द महसूस हुआ।वो समझ गई—पीरियड्स हो गए।उसने चुपचाप अपना काम निपटाने की कोशिश की, लेकिन बातसास तक पहुँच गई।सास की आवाज़ पूरे घर में गूँज उठी—राम-राम-राम!गंदी लड़की!पूरे घर को अशुद्ध कर दिया!संस्कृति सन्न रह गई।सास ने उसका हाथ ज़ोर से पकड़ा और घसीटते हुए घर के पिछले हिस्से की तरफ ले चली।संस्कृति डर गई।संस्कृति बोली - माँजी… मुझे दर्द हो रहा है…।लेकिन कोई नहीं रुका।