दुनिया को लगता है कि लड़का होना आसान है, पर सच बोलूं तो—आसान कुछ भी नहीं होता। लड़का भी थकता है, टूटता है, डरता है। बस फर्क इतना है कि उसे अपनी कमजोरी दिखाने की इजाजत नहीं।उसे हर बात पर ताने मिलते हैं—"तू बड़ा हो गया है संभल जा""भविष्य का क्या सोचा है?""मर्द बन, रो क्यों रहा है? तू लड़का है।"कोई देखता नहीं पर एक लड़का अपने अंदर सैकड़ों लड़ाइयाँ लड़ता है।Career का दबाव,Parents का भरोसा,Self-respect का डर,और वो खामोश रातें—जिनमें वो खुद से ही हारता है।कभी-कभी उसे अपने ही दोस्तों के बीच छोटा महसूस होता है क्योंकि उसकी जेब