सौदे का सिन्दूर - भाग 2

संगमरमर की ठंडक राठौर मेंशन का वह विशालकाय लोहे का द्वार किसी भूखे अजगर के जबड़ों की तरह धीरे-धीरे खुला। मूसलाधार बारिश के बूंदो को चीरती हुई काली मर्सिडीज ने धीरे से भव्य परिसर में प्रवेश किया। वहां एक अजीब-सी 'जानलेवा खामोशी' दिख रही थी, जिसे केवल विंडस्क्रीन पर चलते वाइपरों की रगड़ और आसमान में गूंजती बादलों की गर्जना ही चुनौती दे पा रही थी।पिछली सीट के कोने में बैठी सान्वी की सांसें अटकी हुई थीं। उसकी बनारसी साड़ी का भीगा हुआ पल्लू उसके शरीर में एक अजीब सीहरन पैदा कर रहा था। यह ठंड बाहर के वातावरण का नहीं,