अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या मन ही मन वीर को चाहती रही और अनुराग के स्पर्श से असहज होती रही। लेकिन अनुराग धैर्य और प्रेम से उसका सम्मान करता रहा, जिससे अनन्या चाहकर भी उसे दोषी साबित नहीं कर सकी। अब इसके आगे- इसी तरह देखते ही देखते अनुराग और अनन्या की शादी के चार दिन बीत गए। पाँचवें दिन अनन्या अपने बेडरूम की खिड़की के पास खड़ी बाहर देख रही थी। तभी वीर उसे दूर खड़ा दिखाई दिया। उसे देखते ही अनन्या के दिल की धड़कनें बढ़ने लगीं। वह डर भी रही थी कि कहीं किसी को शक