अन्तर्निहित - 30

[30]‘शैल को गए इतना समय हो गया। अभी तक नहीं लौटा। क्या कभी नहीं लौटेगा?’‘संभव है सारा, सब कुछ संभव है।’‘मैं जानती हूँ कि दोष मेरा है किन्तु मुझे अपना पक्ष रखने का एक अवसर भी नहीं दिया शैल ने?’‘इतना सब कुछ जानकर किस बात पर तुम अपना पक्ष रखती? क्या उस पर शैल विश्वास करता?’‘नहीं। कोई भी विश्वास नहीं करता। किन्तु एक बार बात को सुन लेता। पश्चात वह चले जाता, मुझ पर अप्रसन्न रहता, क्रोध करता तो भी मैं सह लेती।’‘अब तो वह संभव नहीं है सारा।’ सारा ने स्वयं से बात बंद कर ली। आँखें बंद कर