बेटा बड़ी थकान महसुस हो रही थी। रास्ते में कई बार कई पेड़ के नीचे बैठ कर सुस्ता चुका मोहना का ऐसा हाल था। एक तो शरिरिक कमजोरी, उस पर तबियत खराब और जाना इतना जरूरी था कि बिना गए काम न बने।माँ के इस बात पर ’’ दो दिन नहीं जाएगा तो कौन सा आफत आ जाएगा। ’’मोहना ने जवाबस्वरूप कहा ’’ माँ, बिगड़ने का क्या है। मगर उसका, जिसके पास मैं जा रहा हूं, उसका मन बदल गया तो बहुत कुछ बदल जाएगा। ’’मोहना को कम ही उम्र में बड़ा तर्जूबा हो गया था। कम से कम इतना