सुबह का तारा

सुबह का तारा आज के नए ज़माने के शहरों में ज़्यादातर तालीमयाफ़्ता नौजवान अच्छी नौकरी की तलाश में घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों या विदेशों में बसना पसंद कर रहे हैं | लिहाज़ा संयुक्त परिवार तो अब पुराने ज़माने की बात हो चुके हैं | परिवार की परिभाषा अब मियाँ-बीवी और एक बच्चे तक सिमट कर रह गई है | कई आज़ाद-ख्याल नौजवानों को तो शादी की बंदिशें भी रास नहीं आ रही हैं और वे लिव-इन रिश्ते में रहना ही पसंद करते हैं जिससे कि बग़ैर भारी-भरकम ज़िम्मेवारियों के शादी-शुदा ज़िंदगी का पूरा लुत्फ़ उठाया जा सके | शहरों