पुत्र वियोग में तड़पती गांधारी जब कृष्ण को श्राप देने चली तब कृष्ण गांधारी से कहते हैंमाता मैं शोक ,मोह ,पीड़ा सबसे परे हूँ, न जीत में न हार में, न मान में , न अपमान में, न जीवन मे , न मृत्यु में, न सत्य में , न असत्य में, मैं किसी में नही बंधा हु माता है, काल , महाकाल सब मेरे दास हैं मैं उन्ही से अपने कार्य सिद्ध करवाता हूँ । हे माता युद्ध अवश्यम्भावी था ..जो चले गए हैं उन पर शोक मत करो बल्कि जो हैं उन्हें स्वीकारो माता ..!! वर्तमान को स्वीकारो माता,